एक असाधारण राजनीतिक यात्रा की प्रेरक गाथा
"आसान नहीं दिग्विजय होना" वरिष्ठ राजनेता और जननेता दिग्विजय सिंह के जीवन, संघर्ष, विचार और सार्वजनिक जीवन की यात्रा पर आधारित एक महत्वपूर्ण संस्मरण है। लेखक सुशांत साईं सुंदरम ने इस पुस्तक के माध्यम से दिग्विजय सिंह के व्यक्तित्व और उनके राजनीतिक जीवन के अनेक पहलुओं को सहज और रोचक शैली में प्रस्तुत किया है।
यह ई-बुक उन पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो भारतीय राजनीति, संसदीय परंपरा और बिहार की राजनीतिक विरासत को समझने में रुचि रखते हैं।
दिग्विजय सिंह : एक संक्षिप्त परिचय
दिग्विजय सिंह का जन्म 14 नवंबर 1955 को बिहार के जमुई जिले के गिद्धौर प्रखंड के नयागांव में हुआ था। गिद्धौर राज परिवार से संबंध रखने वाले दिग्विजय सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से निकले इस युवा नेता ने वर्ष 1990 में पहली बार राज्यसभा में प्रवेश किया और उसी दौरान पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के मंत्रिमंडल में मंत्री भी बने।
अपने 55 वर्षों के जीवनकाल में वह कुल पाँच बार संसद सदस्य रहे, तीन बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के सदस्य के रूप में। वर्ष 1999 से 2004 तक अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में भी उन्होंने मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
24 जून 2010 को लंदन में ब्रेन हैमरेज के कारण उनका निधन हो गया, लेकिन भारतीय राजनीति में उनका योगदान आज भी याद किया जाता है।
इस पुस्तक में क्या है खास?
✔ दिग्विजय सिंह के जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव
✔ संस्मरणात्मक शैली में रोचक प्रस्तुति
✔ राजनीति और इतिहास में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री
लेखक : सुशांत साईं सुंदरम
लेखक सुशांत साईं सुंदरम ने इस संस्मरण में तथ्यों और स्मृतियों को एक साथ पिरोते हुए पाठकों के सामने दिग्विजय सिंह के व्यक्तित्व का जीवंत चित्र प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
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आसान नहीं दिग्विजय होना (संस्मरण) ई-बुक Amazon Kindle पर उपलब्ध है।
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“आसान नहीं दिग्विजय होना” लेखक सुशांत साईं सुंदरम द्वारा लिखित एक प्रेरक संस्मरण है, जिसमें दिग्विजय सिंह के राजनीतिक जीवन और संघर्षों को रोचक शैली में प्रस्तुत किया गया है। eBook Amazon Kindle पर उपलब्ध है।


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