पंद्रह का पहाड़ा (कविता)

पंद्रह का राजनितिक पहाड़ा
देसी स्वाद में

पंदरकां पंदरें
पंदर दुनी तीस
केजरी निकला चार सौ बीस
तीयो पैंतालीस
चौके साठ
राहुल की तो लुट गई खाट
दाम पचहत्तर
छक्की नब्बे
मुलायम रह गए हक्के-बक्के
सति पछोतल
अट्ठी बीसा
नोटबंदी में मोदी ने पीसा
नमा पैंतीसा
पंद्रह दाहें डेढ़ सौ
नेतवन सब की जय हो।

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