देवताओं के महादेव


"तुम ईश्वरों के अर्थात नियंत्रकों के महेश्वर हो, तुम देवताओं के महादेव हो. तुम अधिपतियों के महाधिपती हो. तुम श्रेष्ठों में श्रेष्ठतम हो. तुम समस्त विश्व में पूजनीय हो. इस कारण हे शिव, तुम्हें मैं जानूं या ना जानूं, तुम सबके ईश हो, तुम महेश हो."


हे शिव! तुम्हारे गुणों का वर्णन करना मनुष्य के सामर्थ्य के बाहर है. हे आदिपिता, आदिदेव, मनतरेश, महेश, महादेव! तुम्हारे गुणों का वर्णन संभव नहीं है. विद्या की अधिष्ठात्री माँ सरस्वती भी तुम्हारे गुणों का वर्णन नहीं कर सकतीं.

उपनिषद् में कहा गया है- शिवम, शान्तम, अद्वैतम, चतुर्तम, मन्यांते से आत्मा, से विग्यनेय:

मार्कण्डेय पुराण में वर्णित है- 'निरंजनो निराकारो एको देव महेश्वर:. मृत्यु मुखाम गतात प्राण बलात रक्षति.'
अर्थात- निरंजन एवं निराकार महेश्वर ही एकमात्र देव हैं, जो मृत्यु के मुख में गये हुए प्राणों की बलपूर्वक रक्षा करने में समर्थ हैं.

हर हर महादेव

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